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विटामिन D की कमी के संकेत और लक्षण

विटामिन D की कमी के संकेत और लक्षण

Read in English: Signs and Symptoms of Vitamin D Deficiency

भारतीय उपमहाद्वीप में विटामिन D की कमी एक तेजी से उभरती हुई, लेकिन अक्सर अनदेखी की जाने वाली स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है, जो लगभग 70%–100% आबादी को प्रभावित करती है।

अच्छी बात यह है कि हमारा शरीर सूर्य की रोशनी से स्वयं विटामिन D बना सकता है।

लेकिन बुरी बात यह है कि आधुनिक जीवनशैली के कारण बहुत कम लोगों को पर्याप्त धूप मिल पाती है।

👉क्या आप जानते हैं? पिछले एक दशक में विटामिन D को अनेक स्वास्थ्य समस्याओं की रोकथाम और उपचार से जोड़ा गया है।

हमें विटामिन D की आवश्यकता क्यों होती है?

विटामिन D एक वसा में घुलनशील (Fat-soluble) विटामिन है, जो अच्छे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। यह हड्डियों को मजबूत बनाने, मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर रखने और अच्छी नींद को बढ़ावा देने में मदद करता है।

विटामिन D शरीर में कैल्शियम के अवशोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इससे कैल्शियम की कमी का जोखिम कम होता है। कैल्शियम की कमी से ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियों का घनत्व कम होना) हो सकता है, जिससे हड्डियाँ आसानी से टूटने लगती हैं।

विटामिन D की कमी का संबंध संक्रामक (Communicable) और गैर-संक्रामक (Non-communicable) दोनों प्रकार की बीमारियों से पाया गया है। इनमें शामिल हैं:

  • टाइप 1 और टाइप 2 मधुमेह
  • हृदय रोग
  • श्वसन संक्रमण
  • रूमेटॉइड आर्थराइटिस
  • HIV की प्रगति
  • मोटापा
  • ऑस्टियोपोरोसिस
  • उच्च रक्तचाप
  • अस्थमा
  • मल्टीपल स्क्लेरोसिस
  • इरिटेबल बाउल डिजीज
  • विभिन्न प्रकार के कैंसर (जैसे फेफड़ों, कोलोरेक्टल और स्तन कैंसर)
👉क्या आप जानते हैं? विटामिन D को “सनशाइन विटामिन” क्यों कहा जाता है? क्योंकि सूर्य की रोशनी के संपर्क में आने पर आपकी त्वचा स्वयं विटामिन D बनाती है। जब शरीर को पर्याप्त विटामिन D नहीं मिलता या शरीर इसका सही उपयोग नहीं कर पाता, तब विटामिन D की कमी हो जाती है।

आपको प्रतिदिन कितने विटामिन D की आवश्यकता होती है?

वयस्कों को प्रतिदिन 15 से 20 माइक्रोग्राम (600–800 IU) विटामिन D की आवश्यकता होती है। वहीं शिशुओं, बच्चों और किशोरों के लिए उनकी आयु के अनुसार 10 से 15 माइक्रोग्राम (400–600 IU) प्रतिदिन की आवश्यकता होती है। 70 वर्ष से अधिक आयु के वयस्कों को सामान्यतः प्रतिदिन 800 IU (20 माइक्रोग्राम) विटामिन D की आवश्यकता होती है।

अच्छी बात यह है कि समय रहते पहचान हो जाने पर विटामिन D की कमी का उपचार सप्लीमेंट्स के माध्यम से अपेक्षाकृत आसान होता है। विटामिन D का स्तर बढ़ाने के लिए पौष्टिक भोजन करें, सुबह की धूप लें और डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट्स का सेवन करें।

👉क्या आप जानते हैं? बहुत कम खाद्य पदार्थों, विशेष रूप से शाकाहारी भोजन में, पर्याप्त मात्रा में विटामिन D पाया जाता है। इसलिए विटामिन D से फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों का सेवन करना बेहतर माना जाता है। खरीदते समय पोषण संबंधी लेबल अवश्य देखें।

विटामिन D प्राप्त करने के लिए क्या खाएं:

  • मछली (सैल्मन, टूना, ट्राउट, मैकेरल आदि)
  • अंडे की जर्दी
  • फोर्टिफाइड डेयरी उत्पाद (दूध, दही, पनीर)
  • फोर्टिफाइड सोया उत्पाद
  • फोर्टिफाइड नाश्ते के सीरियल, ओटमील और ऑरेंज जूस
  • बादाम का दूध
  • मशरूम
  • कॉड लिवर ऑयल
  • सप्लीमेंट्स

किन लोगों में विटामिन D की कमी होने का खतरा अधिक होता है?

विटामिन D की कमी किसी भी व्यक्ति को हो सकती है, चाहे वह शिशु हो, बच्चा हो या वयस्क।

हालांकि, कुछ लोगों में इसका खतरा अधिक होता है:

  • जिनकी त्वचा का रंग गहरा होता है (अर्थात अधिक मेलानिन)
  • जो हमेशा पूरे शरीर को कपड़ों से ढककर रखते हैं (जैसे मध्य-पूर्व के कुछ देशों में)
  • अधिकतर समय घर के अंदर रहने वाले बुजुर्ग
  • अधिक वजन वाले लोग
  • ऑस्टियोपोरोसिस से पीड़ित व्यक्ति
  • सीलिएक रोग, इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज, किडनी रोग, लिवर रोग या अन्य अवशोषण संबंधी विकार (Malabsorption Disorders) वाले लोग
  • जिनकी वजन कम करने की सर्जरी हुई हो
  • कुछ विशेष दवाइयाँ लेने वाले लोग (जैसे कुछ एंटी-कन्वल्सेंट्स, ग्लूकोकॉर्टिकोइड्स और वसा के अवशोषण को प्रभावित करने वाली दवाइयाँ)
  • केवल स्तनपान करने वाले शिशु
  • लैक्टोज असहिष्णुता (Lactose Intolerance) या दूध से एलर्जी वाले लोग
👉क्या आप जानते हैं? विटामिन D की अधिक मात्रा भी नुकसानदायक हो सकती है। इससे मतली, उल्टी, किडनी स्टोन, भ्रम और अत्यधिक प्यास जैसी समस्याएँ हो सकती हैं। साथ ही, विटामिन D सप्लीमेंट्स कुछ दवाइयों के साथ प्रतिक्रिया भी कर सकते हैं। इसलिए डॉक्टर की सलाह के बाद ही सप्लीमेंट्स लें।

विटामिन D की कमी कितनी आम है?

दुनिया भर में विटामिन D की कमी लगातार बढ़ रही है। यह पुरुषों और महिलाओं, सभी आयु वर्गों, सभी नस्लों और विभिन्न देशों के लोगों को प्रभावित करती है।

ऐसा माना जाता है कि दुनिया की लगभग 50% आबादी में विटामिन D की कमी पाई जाती है। विभिन्न अध्ययनों के अनुसार, विश्वभर में लगभग 1 अरब लोग विटामिन D की कमी या अपर्याप्तता से प्रभावित हैं।

यूरोप में लगभग 100 में से 40 लोग विटामिन D की कमी से प्रभावित हैं, जबकि 100 में से 13 लोगों में इसकी गंभीर कमी पाई जाती है।

वहीं भारतीय उपमहाद्वीप में विटामिन D की कमी से प्रभावित लोगों का प्रतिशत 70% से 100% के बीच है।

यदि आप अपने विटामिन D का स्तर जांचना चाहते हैं, तो इसकी पुष्टि सीरम 25-हाइड्रॉक्सी विटामिन D की रक्त जांच द्वारा की जाती है।

👉क्या आप जानते हैं? बच्चों में विटामिन D की गंभीर कमी रिकेट्स का कारण बन सकती है। इसके लक्षणों में धीमी वृद्धि, टेढ़ी या मुड़ी हुई हड्डियाँ, हड्डियों में दर्द, मांसपेशियों की कमजोरी और जोड़ों में विकृति शामिल हैं। लेकिन यह समझना जरूरी है कि रिकेट्स केवल विटामिन D की कमी के बड़े बोझ का दिखाई देने वाला हिस्सा है।

विटामिन D की कमी के संकेत और लक्षण क्या हैं?

लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि कमी कितनी गंभीर है और व्यक्ति कौन है। हल्की विटामिन D की कमी वाले अधिकांश लोगों में कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते।

हालांकि, यदि आपको लगातार थकान रहती है, मूड में बदलाव महसूस होता है या हड्डियों एवं मांसपेशियों में दर्द रहता है, तो यह विटामिन D की कमी का संकेत हो सकता है।

👉क्या आप जानते हैं? गर्भवती महिलाओं में विटामिन D की कमी होने पर गर्भकालीन मधुमेह (Gestational Diabetes Mellitus), प्री-एक्लेम्पसिया, समय से पहले प्रसव तथा अन्य ऊतक-विशिष्ट (Tissue-specific) समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।

रोगियों में निम्नलिखित लक्षण दिखाई दे सकते हैं:

  • कमजोर प्रतिरक्षा (बार-बार संक्रमण या बीमारियाँ होना)
  • थकान और अत्यधिक कमजोरी
  • पीठ और हड्डियों में दर्द
  • घावों का धीरे-धीरे भरना
  • हड्डियों का कमजोर होना
  • मूड में बदलाव
  • अवसाद (डिप्रेशन)
  • मांसपेशियों में कमजोरी, दर्द और ऐंठन
  • बाल झड़ना
  • ऑस्टियोपोरोसिस और हड्डियों का टूटना
  • एक्जिमा (त्वचा रोग)
  • मूत्र मार्ग संक्रमण (UTIs), मूत्र असंयम (Incontinence)
  • भूख कम लगना
  • मसूड़ों की बीमारी और दाँतों का गिरना
  • ऑस्टियोमलेशिया (हड्डियों का मुलायम होना)
  • रिकेट्स (बच्चों में टेढ़े पैर)
  • नींद से जुड़ी समस्याएँ
👉क्या आप जानते हैं? सूर्य से आपके शरीर को कितना विटामिन D मिलेगा, यह कई बातों पर निर्भर करता है—मौसम, दिन का समय, धूप में बिताया गया समय, वायु प्रदूषण, बादलों की मौजूदगी, त्वचा में मेलानिन की मात्रा आदि। अधिक वायु प्रदूषण 290–300 nm तरंगदैर्ध्य वाली UV किरणों को काफी हद तक रोक देता है।

विटामिन D की कमी का तुरंत पता नहीं चल पाता क्योंकि इसके लक्षण अक्सर बहुत हल्के होते हैं या कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से मिलते-जुलते होते हैं। इसलिए डॉक्टर आपको रक्त जांच या बोन डेंसिटी टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं।

यदि आप, आपके परिवार का कोई सदस्य या आपका कोई मित्र इस ब्लॉग में बताए गए विटामिन D की कमी के किसी भी लक्षण का अनुभव कर रहा है, तो चंडीगढ़ के निकट मोहाली स्थित सोहाना हॉस्पिटल आएँ। ट्राइसिटी के केंद्र में स्थित यह मल्टी-सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल विभिन्न विशेषज्ञताओं वाले अनुभवी डॉक्टरों की टीम के साथ गुणवत्तापूर्ण उपचार प्रदान करता है।

हमारे अनुभवी डॉक्टर आपकी शारीरिक जांच, मेडिकल हिस्ट्री और आधुनिक डायग्नोस्टिक परीक्षणों की सहायता से आपके लक्षणों का मूल्यांकन करते हैं। जितनी जल्दी विटामिन D की कमी का पता चलता है, उतनी ही जल्दी इसका उपचार शुरू किया जा सकता है।

यदि कोई बच्चा रिकेट्स से पीड़ित है, तो भविष्य की जटिलताओं से बचने के लिए समय पर उपचार बेहद आवश्यक है। इसी प्रकार, यदि कोई वयस्क पीठ दर्द या विटामिन D की कमी से जुड़े अन्य लक्षणों से परेशान है, तो उसे भी समय रहते उपचार लेना चाहिए।

सुबह की हल्की धूप का आनंद लें। यह आपकी हड्डियों के लिए लाभदायक है।

क्या आपको विटामिन D की कमी के कोई लक्षण दिखाई दे रहे हैं? सोहाना हॉस्पिटल से संपर्क करें: +91 87250 01155